Gwalior ka yeh Mandir saal me ek baar Khulta hai

आज खुलेगे 450 साल पुराने भगवान कार्तिकेय मंदिर के पट


जीवाजीगंज स्थित भगवान नारायण कार्तिकेय स्वामी मंदिर के पट 15 नवंबर शुक्रवार कार्तिक मास की पूर्णिमा पर खुलेंगे। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि वर्ष में एक ही दिन खुलने वाले करीब 450 वर्ष पुराने इस मंदिर पर प्रदेश के साथ-साथ दूसरे प्रदेशों के श्रद्धालु भी दर्शनों के लिए आते हैं।15 नवंबर रात 12 बजे के बाद मंदिर के पट खोलकर भगवान कार्तिकेय का शृंगार किया जाएगा और 15 नवंबर को सुबह 4 बजे से श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ मंदिर खोला दिया जाएगा। 16 नवंबर को सुबह 4 बजे पट बंद कर दिए जाएंगे।
जीवाजीगंज स्थित भगवान कार्तिकेय के मंदिर में ही गंगा यमुना, सरस्वती एवं वेणीमाधव भगवान का भी मंदिर है, जो भक्तो के लिए रोजाना खुलता है। इनके दर्शन कभी भी किये जा सकते है। ग्वालियर का एकमात्र मंदिर है, जहां तीनों गंगा, जमना एवं सरस्वती एक साथ विराजमान हैं। उनका कहना है कि यह मंदिर 450 साल पुराना है। पुजारी परिवार के मुताबिक साधू संतों के द्वारा प्रतिमा की स्थापना की गई थी। यहां कार्तिकेय भगवान की छह मुख वाली पत्थर की प्रतिमा है, इसमें वह अपनी प्रिय सवारी मोर पर सवार हैं।


श्रद्धालु इस दिन भगवान कार्तिकेय पर प्रशाद चढ़ाकर अपनी मन्नत मांगते है। कहा जाता है कि जो इस दिन अपनी मन्नत मांगता है वह पूरी होती है। मन्नत पूरी होने पर अगले वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर पुनः दर्शन करने आते है।
कार्तिकेय ने दिया श्राप
कार्तिकेय ने तीनों लोक की परिक्रमा पूरी की और वापस लौटे तो देखा गणेश की प्रथम पूज्य देवता के रूप में जय जयकार हो रही है।सभी ने उन्हें प्रथम पूज्य भगवान मान लिया।इस पर कार्तिकेय माता पार्वती से नाराज हो गए और खुद को गुफा में बंद कर किसी को दर्शन न देने की शपथ ले ली।श्राप दिया कि जो महिला उनके दर्शन करेगी विधवा हो जाएगी और पुरुष 7 जन्म के लिए नरक में जाएंगे।इस पर भगवान शिव और माता पार्वती ने उन्हें समझाया।जब कार्तिकेय का गुस्सा शांत हुआ तो उनको पछतावा भी हुआ।माता पार्वती ने उन्हें साल में एक दिन दर्शन देने के लिए मना लिया।तब कार्तिकेय ने कहा वो अपने जन्मदिवस कार्तिक पूर्णिमा के दिन भक्तों को दर्शन देंगे।इस पर भगवान शिव ने वरदान दिया कि कार्तिक के जन्मदिन यानी कार्तिक पूर्णिमा पर कार्तिकेय के दर्शन करने से भक्तों की सभी मन्नतें पूरी होंगी।इसलिए ग्वालियर का ये मंदिर साल में एक दिन के लिए खुलता है।

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